रिलायंस स्मार्ट बाज़ार को उपभोक्ता अधिकारों के उलंघन पर उपभोक्ता आयोग का झटका, बिलासपुर उपभोक्ता आयोग ने रिलायंस स्मार्ट बाज़ार को 3000 रू मुआवज़ा देने का आदेश दिया

बिलासपुर उपभोक्ता आयोग

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बिलासपुर (छ.ग.)। रिलायंस स्मार्ट बाज़ार पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया जिसमें रिलायंस स्मार्ट बाज़ार को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी पाया गया। उपभोक्ताओ की सुरक्षा और अनुचित व्यापारिक व्यवहार पर रोक लगाने के लिए उपभोक्ता आयोग समय-समय पर महत्वपूर्ण निर्णय देता रहा है। हाल ही में यह मामला तब सामने आया जब जायरा आमिना उम्र 21 वर्ष, बिलासपुर ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। उनके अधिवक्ता ’’श्री सरताज अफज़ल’’ ने आयोग के समक्ष यह परिवाद प्रस्तुत किया।

बिलासपुर उपभोक्ता आयोग का मामलाजायर

जयरा अमीना बनाम रिलायंस स्मार्ट बाज़ार DC/375/CC79/2025

परिवादी ने दिनांक ’’15 अप्रैल 2025’’ को रिलायंस स्मार्ट बाज़ार, सीपत रोड, बिलासपुर से ’’1 किलो टाटा अग्नि लीफ टी’’ खरीदी थी। उस पैकेट पर ’’एमआरपी 235 रुपये’’ अंकित था, लेकिन दुकान द्वारा उनसे ’’238 रुपये वसूले गए’’, यानी 3 रुपये अधिक।
जब उपभोक्ता ने विरोधी पक्षकार को इस त्रुटि के बारे में दिनांक 22 अप्रैल 2025 को ’’पंजीकृत डाक द्वारा विधिक सूचना भेजी’’, तब भी कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही गलती सुधारने का प्रयास किया गया।
इसके बाद उपभोक्ता ने मानसिक और आर्थिक क्षति का हवाला देते हुए ’’50,000 रुपये हर्जाना’’ और अन्य उचित मुआवजे की मांग के साथ आयोग में परिवाद दायर किया। इस तरह रिलायंस का ही मामला जिला उपभोक्ता आयोग रायगढ़ में भी दर्ज था जिसमे एमआरपी से 5 रूपये ज्यादा वसूली रायगढ़ आयोग ने 6000 रूपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। मामला क्या था पुरी जानकारी के लिए रिलायंस रिटेल पर उपभोक्ता आयोग का बडा फैसला 5रू ज्यादा वसूली पर 6000रू का मुआवज़ा, पर क्लिक करें।

रिलायंस स्मार्ट बाज़ार की स्थिति


इस मामले में ’’रिलायंस स्मार्ट बाज़ार’’ न तो आयोग में उपस्थित हुआ और न ही किसी प्रकार का जवाब या दस्तावेज प्रस्तुत किया। परिणामस्वरूप, मामला ’’एकपक्षीय” रूप से सुना गया।
बिलासपुर उपभोक्ता आयोग में प्रस्तुत दस्तावेज़
परिवादी ने अपने पक्ष में कई साक्ष्य प्रस्तुत किए
टैक्स इनवॉइस (प्रदर्श-सी-01) जिसमें उत्पाद का नाम, खरीदारी की तारीख और भुगतान की गई राशि 238 रुपये स्पष्ट रूप से दर्ज थी।
एमआरपी अंकित पैकेट की फोटो (प्रदर्श-सी-02) जिसमें 235 रुपये एमआरपी लिखा हुआ दिखा।
विधिक नोटिस की प्रति (प्रदर्श-सी-03) जिसमें अधिक राशि वसूले जाने का उल्लेख था।
पंजीकृत डाक की रसीद और पावती (प्रदर्श-सी-04)।
इन सभी दस्तावेजों से यह साबित हुआ कि उपभोक्ता से वाकई एमआरपी से ज्यादा पैसा वसूला गया था।


उपभोक्ता आयोग में विचारण

उपभोक्ता आयोग के समक्ष मुख्य प्रश्न था – ’’क्या विरोधी पक्षकार द्वारा सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार किया गया है?’’
परिवादी की ओर से प्रस्तुत सबूतों और तर्कों की समीक्षा करने पर आयोग इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि’ उपभोक्ता से वसूले गए 238 रुपये में ’’एमआरपी से 3 रुपये अधिक वसूला गया’’। विरोधी पक्षकार ने उपभोक्ता द्वारा भेजे गए नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। आयोग की सुनवाई के दौरान भी विरोधी पक्ष अनुपस्थित रहा। इस आधार पर आयोग ने स्पष्ट रूप से माना कि विरोधी पक्षकार दोषी है और उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार व सेवा में कमी हुई है।

आयोग का आदेश-
उपभोक्ता आयोग बिलासपुर के अध्यक्ष माननीय श्री आनंद कुमार सिंघल, सदस्य श्रीमती पुर्णिमा सिंह, सदस्य श्री आलोक कुमार पाण्डेय
द्वारा मामले की सुनवाई के बाद दिनांक ’’08 सितंबर 2025’’ को अंतिम आदेश पारित किया। आदेश में कहा गया कि विरोधी पक्षकार (रिलायंस स्मार्ट बाज़ार) को आदेश की प्रति प्राप्ति की तिथि से ’’45 दिनों के भीतर 3 रुपये की अतिरिक्त वसूली राशि उपभोक्ता को लौटानी होगी।’’ इसके साथ ही, विरोधी पक्षकार को उपभोक्ता को ’’मानसिक क्षति के एवज में 2,000 रुपये’’ तथा ’’वाद व्यय के लिए 1,000 रुपये’’ का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
अर्थात कुल मिलाकर उपभोक्ता को 3 रुपये वापसी के अलावा ’’3,000 रुपये का मुआवजा’’ प्राप्त होगा।
उपभोक्ता के लिए यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला भले ही ’’सिर्फ 3 रुपये की अतिरिक्त वसूली’’ से जुड़ा हो, लेकिन इसका महत्व बहुत बड़ा है। यह आदेश दर्शाता है कि –

  • राशि चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो उपभोक्ता का अधिकार सर्वोपरि है।
  • व्यापारी और कंपनियां को उपभोक्ताओं से एमआरपी से अधिक राशि वसूलने का अधिकार नही।
  • उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करने से उपभोक्ता को न्याय मिल सकता है।

कानूनी पहलू
परिवादी ने अपने नोटिस में और परिवाद में कई कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया, जिनमें मुख्य रूप से ’’उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019’’ की धारा 35 आती है। यह धारा उपभोक्ताओं को यह अधिकार देती है कि वे सेवा में कमी या अनुचित व्यापारिक व्यवहार होने पर उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर कर सकते हैं।
इसके अलावा, आयोग ने यह भी माना कि विरोधी पक्षकार का नोटिस का जवाब न देना और सुनवाई में अनुपस्थित रहना, यह दर्शाता है कि उसने उपभोक्ता अधिकारों को गंभीरता से नहीं लिया।


उपभोक्ताओं के लिए सबक


इस मामले से उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं

  1. हर खरीदारी पर बिल हमेशा अवश्य लें ताकि किसी भी प्रकार की विवाद की स्थिति में यह बिल ही आपके लिये साक्ष्य का करें।
  2. उत्पाद पर अंकित एमआरपी/अधिकतम मूल्य खुदरा मूल्य की जांच अवश्य करें और उससे अधिक वसूल होने पर तुरंत शिकायत करें।
  3. विधिवत नोटिस भेजें- यदि व्यापारी अपनी गलती सुधारने को तैयार न हो तो लिखित रूप में विधिक नोटिस भेजें।
  4. उभोक्ता आयोग का सहारा ले- उपभोक्ता आयोग एक सशक्त माध्यम है जो उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने का कार्य करता है।

निष्कर्ष

जिला उपभोक्ता आयोग, बिलासपुर का यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की मजबूती का एक बड़ा उदाहरण है। यह स्पष्ट संदेश देता है कि कंपनियों और व्यापारिक संस्थानों को उपभोक्ताओं के अधिकारों का सम्मान करना होगा।

यह आदेश उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाता है कि चाहे मामला छोटा ही क्यों न हो, न्याय अवश्य मिलेगा।

इस प्रकार, रिलायंस स्मार्ट बाजार को सिर्फ 3 रुपये अधिक वसूली करने पर उपभोक्ता आयोग द्वारा ’’3,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश’’ उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा में एक ऐतिहासिक कदम कहा जा सकता है।

इस आदेश की कॉपी आप e-jagriti.gov.in पर जाके देख सकते हैं, जजमेंट कैसे देख सकते हैं इस पर हमने विस्तृत से बताया है ;या निचे दिए गए pdf file से सीधे download कर सकते हैं

जयरा अमीना बनाम रिलायंस स्मार्ट बाज़ार DC/375/CC79/2025

उपभोक्ता आयोग की जजमेंट कैसे देखे?

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