उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कैसे करें? (पूरी प्रक्रिया व प्रारूप – Consumer Protection Act 2019)

उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करने की पूरी प्रक्रिया

consumer protection act 2019 के तहत उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करना काफी सरल है, लेकिन इसके लिए कानूनी दस्तावेजों का एक निश्चित क्रम में होना आवश्यक है। इसमें इंडेक्स (Index), लिस्ट ऑफ डेट्स (List of Dates), सिनोप्सिस (Synopsis), मुख्य शिकायत और शपथ पत्र (Affidavit) का समावेश होता है।नीचे इन सभी दस्तावेजों के प्रारूप और उनके महत्व पर आधारित एक विस्तृत लेख दिया गया है। उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने की संपूर्ण प्रक्रिया और प्रोफार्मा दिया गया है।

भारत में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए त्रि-स्तरीय न्यायिक प्रणाली (जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर) बनाई गई है। जब भी कोई सेवा प्रदाता (Service Provider)) या विक्रेता (Seller) आपको दोषपूर्ण वस्तु या घटिया सेवा देता है, तो आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

शिकायत दर्ज

केस फाइल का क्रम (Order of Document)

एक आदर्श उपभोक्ता शिकायत फाइल में दस्तावेजों का क्रम निम्नलिखित होना चाहिए –

1. इंडेक्स (Index):- इसमें फाइल में लगे सभी दस्तावेजों की सूची और उनके पेज नंबर होते हैं।

2. तारीखों और घटनाओं की सूची (List of Date and Events) मामले का संक्षिप्त विवरण।

3. सिनोप्सिस (Synopsis) – मामले का सारांश।

4. मेमो ऑफ पार्टीज (Memo of Parties)- शिकायतकर्ता और विपक्षी पक्ष का नाम व पता।

5. मुख्य शिकायत (Complaint)- विस्तार से आपकी समस्या।

6. शपथ पत्र (Affidevit)- यह प्रमाणित करने के लिए कि दी गई जानकारी सत्य है।

7. अनुलग्नक (Annexures/Evidence)- बिल, रसीद, वारंटी कार्ड, ईमेल आदि।

महत्वपूर्ण दस्तावेजों का प्रारूप (Drafting Format)।

तारीखों और घटनाओं की सूची (List of Date and Events) यह भाग जज को मामले की पृष्ठभूमि समझने में मदद करता है।
इसे तालिका (Table) के रूप में बनाना सबसे अच्छा होता है।

तारीख घटनाक्रम
10/05/2023 शिकायतकर्ता ने विपक्षी से ₹50,000 का रेफ्रिजरेटर खरीदा।
15/05/2023 रेफ्रिजरेटर में कूलिंग की समस्या आई और कंपनी को सूचित किया गया।
20/05/2023 कंपनी के इंजीनियर ने विजिट की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
01/06/2023 विपक्षी को कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजा गया।

सिनोप्सिस (Synopsis) – सिनोप्सिस में आपको 1-2 पैराग्राफ में यह बताना होता है कि आपके साथ क्या गलत हुआ और आप क्या चाहते हैं।

उदाहरणर – यह शिकायत विपक्षी द्वारा बेचे गए दोषपूर्ण उत्पाद और बिक्री के बाद प्रदान की गई घटिया सेवाओं के संबंध में है, जिसके कारण शिकायतकर्ता को मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी है।

मुख्य शिकायत-

किसी भी कानूनी मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसे उपभोक्ता आयोग के समक्ष आपकी कहानी कह सकते हैं, जिसे कानूनी ढांचे में पिरोया जाता है। आसान शब्दों में, मुख्य शिकायत वह औपचारिक दस्तावेज है जिसमें आप विस्तार से बताते हैं कि आपके साथ क्या गलत हुआ, विपक्षी ने कानून कैसे तोड़ा और आप कोर्ट से क्या चाहते हैं।

नीचे मुख्य शिकायत के अंगों को विस्तार से समझाया गया है

मुख्य शिकायत दर्ज / शिकायत के प्रमुख हिस्से

शीर्षक- सबसे ऊपर उस आयोग का नाम लिखा जाता है जहाँ आप केस कर रहे हैं। जैसे समक्ष, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयो, रायपुर छ.ग.

पक्षकारों का विवरण- इसमें आपका (शिकायतकर्ता) और विरोधी पक्ष का विवरण , उनका नाम, पिता का नाम और पूरा पता लिखा जाता है। ताकि कोर्ट उन्हें समन (नोटिस) भेज सके।

तथ्यों का विवरण- यही शिकायत का असली हिस्सा है। लेनदेन की जानकारी आपने किस तारीख को, कितने पैसे देकर, कौन सी वस्तु या सेवा खरीदी।

सेवा मे कमी – उस वस्तु में क्या खराबी निकली या सेवा में क्या कमी रही? (जैसे नया फ्रिज ठंडा नहीं कर रहा, या इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम गलत तरीके से रिजेक्ट कर दिया)।

कोशिशें- आपने कंपनी के कस्टमर केयर पर कितनी बार बात की, कितने ईमेल भेजे। यहाँ आपके द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस का जिक्र भी होता है।

वाद का कारण – वह तारीख जब पहली बार विवाद शुरू हुआ।

अधिकार क्षेत्र – आपको कोर्ट को यह बताना होता है कि आप उसी कोर्ट में क्यों आए हैं। इसके दो आधार होते हैं

क्षेत्रीय- क्या विपक्ष का ऑफिस यहाँ है? या क्या आपने सामान यहाँ से खरीदा?

आर्थिक – क्या आपके दावे की राशि (सामान की कीमत मुआवजा) उस कोर्ट की लिमिट में है?

प्रार्थना- यह शिकायत का सबसे आखिरी और जरूरी हिस्सा है। यहाँ आप कोर्ट से अपनी मांगें रखते हैं। बिना प्रार्थना के कोर्ट कोई आदेश नहीं दे सकता। इसमें आप मांग सकते हैं –

सामान की कीमत ब्याज सहित वापस मिले।

सामान को नए सामान से बदला जाए l

मानसिक तनाव और परेशानी के लिए मुआवजा

केस लड़ने में हुआ खर्च

मुख्य शिकायत का महत्व क्यों है?

पीठासीन अधीकारी/न्यायधीश का आधार- पीठासीन अधीकारी आपकी पूरी फाइल नहीं पढते, वह सबसे पहले मुख्य शिकायत के बिंदुओं को पढते है ताकि समझ सके कि विवाद क्या है।

उपभोक्ता आयोग शिकायत प्रारूप

शिकायत का प्रारूप हर राज्य/जिला में अलग- अलग हो सकता है यह प्रारूप छ.ग. का है।

शपथ पत्र का प्रारूप – शपथ पत्र सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है क्योंकि यह आपकी शिकायत को कानूनी रूप से मान्य बनाता है। शपथ पत्र मैं,

ध्यान रखने योग्य बातें शुल्क – ₹5 लाख तक की शिकायतों के लिए कोई कोर्ट फीस नहीं लगती (नियमों के अनुसार जांच लें)।ejagariti.gov.in अब आप ऑनलाइन भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

साक्ष्य – हमेशा पक्के बिल, ट्रांजेक्शन आईडी और संचार की प्रतियां लगाएं।

समय सीमा – विवाद उत्पन्न होने के 2 वर्ष के भीतर शिकायत दर्ज करना अनिवार्य है।

निष्कर्ष – उपभोक्ता अयोग में केस फाइल करना कोई कठिन प्रक्रिया नहीं है, बशर्ते आपके पास दस्तावेजों का सही क्रम और ठोस सबूत हों। इंडेक्स और सिनोप्सिस आपके केस को व्यवस्थित बनाते हैं, जिससे पीठासीन अधिकारी को मामला समझने में आसानी होती है।

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