उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर! NCDRC के 4 लैंडमार्क फैसले; जानें बीमा, रियल एस्टेट और मेडिकल नेग्लिजेंस पर क्या कहा

लेख 1: बीमा पॉलिसी के समर्पण मूल्य पर NCDRC का फैसला

Max Life Insurance Co. Ltd. vs. Dinesh Kumar R. Sharma

केस का नाम और तिथि: फर्स्ट अपील संख्या 81/2022। फैसला 06/11/2025 को घोषित किया गया न्यायपीठ: माननीय श्री न्यायमूर्ति ए.पी. साही, अध्यक्ष और माननीय श्री भरतकुमार पांड्या, सदस्य पक्ष और अधिवक्ता: अपीलकर्ता: मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (सुश्री सुमन बग्गा, अधिवक्ता द्वारा प्रतिनिधित्व) उत्तरदाता: दिनेश कुमार आर. शर्मा (श्री मिलन दुधिया, अधिवक्ता द्वारा प्रतिनिधित्व)

NCDRC के 4 लैंडमार्क फैसले

तथ्य और घटनाएँ: उत्तरदाता/शिकायतकर्ता ने जनवरी 2005 में एक संपूर्ण जीवन भागीदारी बीमा पॉलिसी ली । पॉलिसी 25.04.2012 को प्रीमियम का भुगतान न होने के कारण व्यपगत (lapsed) हो गई । बीमाधारक के मधुमेह (diabetes) के इतिहास के कारण पॉलिसी अतिरिक्त प्रीमियम पर जारी की गई थी । व्यपगत होने के बाद, बीमाधारक ने दो बार (15.03.2013 और जुलाई 2013) पॉलिसी को पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया । दोनों ही अनुरोधों को अस्वीकार कर दिया गया, जिसके बाद शिकायतकर्ता ने राज्य आयोग में शिकायत दर्ज की । गुजरात राज्य आयोग ने 18.10.2021 को पॉलिसी के पूर्ण पेड अप एडिशन (PUA) मूल्य के आधार पर भुगतान का आदेश दिया । अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि उसने पहले ही ₹4,76,860.60 का अंतिम समर्पण मूल्य दे दिया है और PUA का पूर्ण मूल्य केवल परिपक्वता या मृत्यु पर ही देय होता है

महत्वपूर्ण निष्कर्ष और आदेश: NCDRC ने माना कि राज्य आयोग ने PUA के पूर्ण मूल्य के भुगतान का निर्देश देकर गलती की । आयोग ने अपीलकर्ता बीमा कंपनी द्वारा निर्धारित ₹11,00,042.96 के नकद समर्पण मूल्य (Cash Surrender Value) को सही माना । NCDRC ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया और राज्य आयोग के आदेश को संशोधित किया

  • अंतिम आदेश: बीमाकर्ता को ₹11,00,042.96 की पूरी राशि पर, पॉलिसी व्यपगत होने की तारीख 25.04.2012 से भुगतान की तारीख 23.03.2018 तक के लिए, ऋण पर लगाए गए ब्याज की दर और सूत्र के अनुसार मुआवजा (ब्याज) की गणना और भुगतान करने का निर्देश दिया गया ।
  • भुगतान दो महीने के भीतर करना होगा, जिसके विफल होने पर 9% साधारण ब्याज देय होगा ।

लेख 2: विलंबित लिखित बयान पर NCDRC का निर्णय

(Presidency Indraheights Pvt. Ltd. vs. Rita W/o. Winfred Charles Anchan & Anr.)

केस का नाम और तिथि: फर्स्ट अपील संख्या NC/FA/316/2025। निर्णय दिनांक: 18/11/2025 न्यायपीठ: माननीय श्री न्यायमूर्ति ए. पी. साही, अध्यक्ष और माननीय श्री भरतकुमार पांड्या, सदस्य पक्ष और अधिवक्ता: अपीलकर्ता: प्रेसीडेंसी इंद्रहाइट्स प्राइवेट लिमिटेड (अधिवक्ता: श्री राघवेंद्र प्रताप सिंह, श्री अक्षत कश्यप, श्री मोहित यादव) उत्तरदाता: रीता और विनफ्रेड चार्ल्स आंचन (शिकायतकर्ता)

तथ्य और घटनाएँ: उत्तरदाताओं ने ₹93,04,680/- के पेंटहाउस यूनिट (T-1/2202, प्रेसिथम प्रोजेक्ट, नोएडा) की बुकिंग के संबंध में शिकायत (CC No. 2 of 2024) दायर की थी । शिकायत में ₹58,09,873/- की राशि ब्याज सहित वापस करने की मांग की गई थी, क्योंकि अपीलकर्ता द्वारा समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया गया था । राज्य आयोग द्वारा नोटिस 04.01.2024 को जारी किए गए थे । अपीलकर्ता ने स्वीकार किया कि उसे नोटिस 31.01.2024 को प्राप्त हुआ था । वैधानिक समय सीमा (45 दिन) मार्च 2024 के मध्य तक समाप्त हो गई । अपीलकर्ता ने अपना लिखित बयान (Written Statement) विलंब से 24.07.2024 को (नोटिस मिलने के लगभग 6 महीने बाद) दायर किया । राज्य आयोग ने 12th मार्च 2025 को यह कहते हुए अपीलकर्ता का लिखित बयान रिकॉर्ड पर लेने से इनकार कर दिया कि यह समय सीमा से बाहर है

महत्वपूर्ण निष्कर्ष और आदेश: NCDRC ने पाया कि अपीलकर्ता को नोटिस 31.01.2024 को प्राप्त हो चुका था, जिसके बाद लिखित बयान दायर करने की वैधानिक समय सीमा (45 दिन) समाप्त हो गई थी । अपीलकर्ता का लिखित बयान 24.07.2024 को जमा किया गया, जो स्पष्ट रूप से वैधानिक अवधि के बाहर था, और इसके लिए विलंब माफी का कोई अनुरोध भी नहीं किया गया था । आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि विलंब से दायर किए गए लिखित बयान को न पढ़ने का राज्य आयोग का निष्कर्ष सही है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है

  • अंतिम आदेश: अपील खारिज कर दी गई ।

लेख 3: चिकित्सा लापरवाही और एकतरफा कार्यवाही पर फैसला

(Dr. S. K. Debnath vs. Samina Khatun & Ors.)

केस का नाम और तिथि: NC/FA/155/2022। निर्णय दिनांक: 14th नवंबर 2025 न्यायपीठ: माननीय श्री न्यायमूर्ति ए.पी. साही, अध्यक्ष और माननीय श्री भरतकुमार पांड्या, सदस्य पक्ष और अधिवक्ता: अपीलकर्ता: डॉ. एस. के. देबनाथ (श्री पीयूष कांति रॉय, वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा प्रतिनिधित्व) उत्तरदाता: समीना खातून और अन्य (समीना खातून R-1)

तथ्य और घटनाएँ: उत्तरदाता सं. 1 (समीना खातून, शिकायतकर्ता) ने अपीलकर्ता (डॉ. एस. के. देबनाथ) के खिलाफ चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत (CC No. 5/2020) दायर की । आरोप था कि अपीलकर्ता ने टीनिया कॉर्पोरिस (Tinea Corporis) और खुजली (scabies) जैसे त्वचा रोगों के लिए स्टेरॉयड और अधिक मात्रा में इम्युनोसप्रेसेंट ड्रग्स दीं, जिसके कारण शिकायतकर्ता के चयापचय और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ा । अपीलकर्ता द्वारा नोटिस लेने से इनकार करने के बाद शिकायत राज्य आयोग में एकतरफा (ex-parte) आगे बढ़ी । पश्चिम बंगाल राज्य आयोग ने 08.10.2021 को अपीलकर्ता पर ₹5 लाख हर्जाना और ₹10,000/- मुकदमे की लागत का आदेश दिया । वसूली प्रमाण पत्र जारी होने के बाद अपीलकर्ता ने यह दावा करते हुए अपील दायर की कि उसे कार्यवाही की जानकारी नहीं थी । NCDRC ने 09.06.2022 को अंतरिम आदेश पारित कर आदेश पर रोक लगा दी, बशर्ते अपीलकर्ता डिक्री राशि का 50% जमा करे

महत्वपूर्ण निष्कर्ष और आदेश: NCDRC ने पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं प्रस्तुत किए गए नुस्खों की पर्याप्त जांच किए बिना राज्य आयोग ने लापरवाही का निष्कर्ष निकालने में गलती की । हालाँकि, आयोग ने यह भी माना कि अपीलकर्ता उपचार के लगभग तीन महीने बाद भी पूरे शरीर पर चकत्ते (rashes) फैलने का कोई वैध स्पष्टीकरण नहीं दे सका । आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि सुधारात्मक दवाएँ देने में “कुछ कमी” (some deficit) थी

  • अंतिम आदेश: अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया गया । राज्य आयोग द्वारा दिया गया शेष हर्जाना रद्द कर दिया गया, लेकिन 09.06.2022 के अंतरिम आदेश के तहत जमा की गई 50% राशि को शिकायतकर्ता को उसके उपचार खर्चों और शारीरिक कष्ट को पूरा करने के लिए जारी करने का निर्देश दिया गया ।

लेख 4: अंतरिम आदेशों को क्षेत्राधिकार से बाहर मानने पर फैसला

(Jaguar Land Rover India Ltd. vs. M/S. Eapro Global Limited & Anr.)

केस का नाम और तिथि: फर्स्ट अपील संख्या NC/FA/1030/2024। निर्णय दिनांक: 17/11/2025 न्यायपीठ: माननीय श्री न्यायमूर्ति ए. पी. साही, अध्यक्ष और माननीय श्री भरतकुमार पांड्या, सदस्य पक्ष और अधिवक्ता: अपीलकर्ता: जगगुआर लैंड रोवर इंडिया लिमिटेड (श्री सुकुमार पट्टजोशी, वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा प्रतिनिधित्व) । उत्तरदाता सं. 1 (शिकायतकर्ता): मैसर्स ईएप्रो ग्लोबल लिमिटेड (श्री कृष्णा कुट्टी, अधिवक्ता) । उत्तरदाता सं. 2 (डीलर): शिवा मोटरकॉर्प जगगुआर लैंड रोवर

तथ्य और घटनाएँ: उत्तरदाता सं. 1 (शिकायतकर्ता) ने डीलर (उत्तरदाता सं. 2) से खरीदे गए “डिफेंडर लैंड रोवर” वाहन में कमी और दोषों का आरोप लगाते हुए शिकायत (CC/02/2024) दायर की । उत्तराखंड राज्य आयोग ने शिकायत लंबित रहने के दौरान उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 38(8) के तहत 03.12.2024 और 16.12.2024 को दो अंतरिम आदेश पारित किए । अपीलकर्ता (निर्माता) ने इन आदेशों को अवैध, अनुचित और क्षेत्राधिकार से बाहर मानते हुए चुनौती दी । NCDRC ने 06.01.2025 को अपील पर नोटिस जारी किया और अंतरिम आदेशों पर रोक लगा दी

महत्वपूर्ण निष्कर्ष और आदेश: अपीलकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता, श्री सुकुमार पट्टजोशी ने तर्क दिया कि अंतरिम आदेश क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण करते हैं क्योंकि वे वस्तुतः अपीलकर्ता को समझौता (settlement) करने के लिए मजबूर करते हैं । आयोग ने अपीलकर्ता के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहने और फिर समझौता करने के लिए मजबूर करने की कोशिश को न्यायोचित (just) या उचित (proper) नहीं पाया । NCDRC ने इस तर्क से सहमति व्यक्त की कि अंतरिम आदेश उस राहत को देने की कोशिश कर रहे थे जो अंतिम चरण में भी नहीं दी जा सकती थी, और वे विवाद को गुण-दोष के आधार पर तय करने के बजाय समझौते के लिए मजबूर कर रहे थे

  • अंतिम आदेश: अपील स्वीकार की गई । राज्य आयोग के अंतरिम आदेश दिनांक 03.12.2024 और 16.12.2024 को रद्द (set aside) कर दिया गया । मामले को शिकायत पर कानून के अनुसार आगे बढ़ने के लिए राज्य आयोग को वापस भेजा (remitted) गया ।

ejagriti.gov.in पोर्टल एक अधिकारिक स्रोत है।

यह पोर्टल उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs), भारत सरकार द्वारा संचालित है।

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