एयर एम्बुलेंस सेवा में कमी : कृतिका अग्रवाल विरूद्ध एयर रेस्कुयर्स वर्ल्ड वाईड प्रा.लि. DC/375/CC/154/2025
आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में एयर एम्बुलेंस का समय पर उपलब्ध होना मरीज के जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है। ऐसे मामलों में सेवा प्रदाता से सर्वाेच्च स्तर की तत्परता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। यदि एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदाता अग्रिम भुगतान प्राप्त करने के बावजूद समय पर सेवा उपलब्ध नहीं कराता और इसके कारण मरीज की मृत्यु हो जाती है, तो यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी (Deficiency in Service) का गंभीर प्रश्न बन जाता है।

एयर एम्बुलेंस सेवा में कमी का पूरा मामला क्या था?
प्रस्तुत मामले में परिवादिनी ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्षकार ने एयर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के लिए ₹7,50,000 की अग्रिम राशि प्राप्त की, लेकिन निर्धारित समय पर सेवा उपलब्ध नहीं कराई, जिससे मरीज की मृत्यु हो गई। इसके बाद विरोधी पक्षकार ने जमा राशि लौटाने से भी इंकार कर दिया।
इन परिस्थितियों को सेवा में कमी बताते हुए परिवादिनी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के समक्ष परिवाद प्रस्तुत किया। परिवाद में ₹7,50,000 की अग्रिम राशि पर 18ः वार्षिक ब्याज, ₹5 करोड़ की क्षतिपूर्ति, ₹1 लाख मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा तथा ₹50,000 वाद व्यय दिलाए जाने की मांग की गई। अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि उपलब्ध साक्ष्यों और पक्षकारों के तर्कों के आधार पर आयोग ने इस विवाद में क्या निर्णय दिया।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 क्या है?
परिवादिनी के आरोप: ₹7.50 लाख लेने के बाद भी समय पर एयर एम्बुलेंस सेवा नहीं मिली
परिवादिनी ने दिनांक 12.07.2025 को एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए विरोधी पक्षकार कंपनी से संपर्क की और उन्होंने बिलासपुर हवाई अड्डा से दिल्ली तक एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदान करने का वादा किये जाने पर परिवादिनी द्वारा एयर एम्बुलेंस सेवा बुक करायी गयी और संपूर्ण भाड़ा राशि 7,50,000/-रूपये अग्रिम इलेक्ट्रिानिक माध्यम से भुगतान किया गया।
दिनांक 12.07.2025 को एयर एम्बुलेंस चकरभाठा, बिलासपुर एयरपोर्ट पहुंचा और मरीज को एयर एम्बुलेंस में शिफ्ट करने के लिए बिना योग्य डॉक्टर एवं आवश्यक चिकित्सा उपकरण के एम्बुलेंस भेजा गया।
परिवादिनी अपने मरीज के साथ हवाई अड्डा पहुंचा तो उसे कैप्टन द्वारा बताया गया दिल्ली में मौसम खराब होने के कारण उडान संभव नहीं हो पाएगा और दिनांक 13.07.2025 को मरीज को दिल्ली पहुंचाने का वचन दिया। विरोधी पक्षकार ने दिनांक 13.07.2025 को मरीज को एयर एम्बुलेंस में शिफ्ट करने के लिए एक कम्पाउंडर के साथ एंबुलेंस भेजा जिसे मरीज की गंभीर स्थिति को संभालने का ज्ञान न होने के कारण हवाई अड्डा ले जाते समय रास्ते में मरीज की मृत्यु हो गयी।
परिवादिनी ने मरीज की मृत्यू हो जाने पर विकल्प के रूप में शव को दिल्ली परिवहन के लिए निवेदन किया जिस पर विरोधी पक्षकार द्वारा आवश्यक दस्तावेजो की मांग की गई। परिवादिनी द्वारा दस्तावेज जमा कराने के उपरांत भी विरोधी पक्ष द्वारा शव का परिवहन करने से इंकार कर दिया गया।
परिवादिनी ने विरोधी पक्षकार कंपनी द्वारा एयर एम्बुलेंस के लिए अग्रिम संपुर्ण राशि की मांग करने पर विरोधी पक्ष द्वारा राषि वापस करने से इंकार किया गया जिससे आहत होकर परिवादिनी ने दिनांक 21.07.2025 को अपने अधिवक्ता के माध्यम से विधिक नोटिस पेश किया था जिसके जवाब में दिनांक 30.07.2025 को विरोधी पक्षकार संस्थान ने प्राप्त अग्रिम राशि को वापस करने से इंकार कर दिया ।
जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत कैसे करें?
एयर एम्बुलेंस कंपनी का पक्ष: खराब मौसम और Non-Refundable Policy का दावा
विरोधी पक्षकार ने अपने जवाब में कहा कि , विरोधी पक्षकार संस्थान बहुत पेशेवर है, मरीज की सुरक्षा और आराम से कोई समझौता नहीं करता है और परिवहन से जुड़े हर विवरण को संभालता और व्यवस्थित करता है।
यह अविवादित है कि परिवादिनी से सेवा के लिए कुल सहमत राशि 7,50,000/रुपये प्राप्त की थी जिसमें विमान उड़ान शुल्क एवं चिकित्सा शुल्क शामिल था। उसमें स्पॉट इन और अन्य लाजिस्टिक लागत भी शामिल रहती है।
राशि प्राप्त होने के बाद सभी गतिविधियां शुरू कर दी गई थी और उपलब्ध स्लॉट बुक कर प्रस्थान निर्धारित किया गया और इसकी सूचना समय-समय पर परिवादिनी को दी गई थी।
परिवादिनी को स्पष्ट रूप से सूचित किया गया था और उसने इसकी गैर वापसी योग्य प्रकृति पर सहमति व्यक्त की थी। यह शर्त विरोधी पक्षकार के वेबसाइट पर भी स्पष्ट रूप से बताई गई थी जिसमें इसके नियम और शर्तों, जिसमें गैर वापसी खंड भी शामिल है के लिए सहमति का गठन किया गया था।
विरोधी पक्षकार की टीम परिवादिनी के संपर्क में थी। एयर एंबुलेंस के आगमन के संबंध में सभी अपडेट समय पर और ठीक से बताये गये थे। यह स्पष्ट करना चाहते है कि रोगी की गंभीर स्थिति और खराब मौसम के कारण दिनांक 12.07.2025 को दिल्ली के लिए उड़ान संचालित नहीं की जा सकी। रोगी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके स्थानांनतरण को 13.07.2026 को पुनः निर्धारित किया गया था। दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम रोगी की गंभीर स्थिति के कारण था ना कि किसी देरी या इंकार के कारण था।
परिवादिनी का तर्क
परिवादिनी के अधिवक्ता ने अपने तर्क में कहा कि परिवादिनी के मामा स्व. बसंत चरण अग्रवाल जो कैंसर पीड़ित थे उनको ईलाज के लिए अपोलो अस्पताल बिलासपुर में दाखिल किया गया था।
ईलाज के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत कैंसर के उच्च स्तरीय अस्पताल मैक्स अस्पताल दिल्ली ले जाने को कहा गया। परिवादिनी ने दिनांक 12.07.2025 को एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए विरोधी पक्षकार कंपनी से संपर्क की और उन्होंने बिलासपुर हवाई अड्डा से दिल्ली तक एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदान करने का वादा किये जाने पर परिवादिनी द्वारा एयर एम्बुलेंस सेवा बुक करायी गयी और संपूर्ण भाड़ा राशि 7,50,000/-रूपये अग्रिम इलेक्ट्रिानिक माध्यम से भुगतान किया था।
दिनांक 12.07.2025 को कैप्टन द्वारा बताया गया दिल्ली में मौसम खराब होने के कारण उडान संभव नहीं हो पाएगा और दिनांक 13.07.2025 को दिल्ली पहुंचाने का वचन दिया था लेकिन उस दिनांक को मरीज को एयर एम्बुलेंस से शिफ्ट करने के लिए एक कंपाउन्डर के साथ एम्बुलेंस भेजा था।
चूंकि मरीज की गंभीर स्थिति थी एवं मरीज को संभालने का अनुभव न होने के कारण मरीज की रास्ते में मृत्यु हो गयी। मरीज के शव को परिवहन के लिए निवेदन करने पर भी दस्तावेज न होने का बहाना कर परिवहन करने से इंकार कर दिया।
विरोधी पक्षकार संस्थान द्वारा जिस मौसम का बहाना बनाकर एयर लिफ्ट करने से इंकार किया गया उसी भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा सूचना के अधिकार से मांगी जानकारी में यह स्पष्ट किया है कि दिनांक 12.07.2025 को शाम 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक फ्लाईट की आवाजाही सामान्य थी।
इस प्रकार विरोधी पक्षकार संस्थान द्वारा मौसम का आधार लेकर मरीज को एयर लिफ्ट न करने से मरीज की आकस्मिक मृत्यु हो गई जो उसके व्यावसायिक कदाचरण और सेवा में कमी को दर्शाता है।
परिवादिनी ने अपने परिवाद के समर्थन में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश तजिंदर सिंह विरूद्ध एयर रेस्कुयर्स वर्ल्ड वाईड प्रा.लि. IV (2025) CPJ 209 (NC) का अवलंबन लिया है।
विरोधी पक्षकार के तर्क
विरोधी पक्षकार के अधिवक्ता ने अपने तर्क में आधार लिया है कि रोगी की गंभीर स्थिति और खराब मौसम के कारण दिनांक 12.07.2025 को दिल्ली के लिए उड़ान संचालित नहीं की जा सकी। रोगी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसके स्थानांतरण को 13.07.2026 को पुनः निर्धारित किया गया था।
दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम रोगी की गंभीर स्थिति के कारण था ना कि किसी देरी या इंकार के कारण था। गैर वापसी योग्य शर्तें परिवादिनी को स्पष्ट रूप से बतायी गयी थी और सूचित सहमति के साथ राशि का भुगतान किया गया था।
अतः राशि वापसी का कोई आधार नहीं होता साथ ही माननीय आधार पर विरोधी पक्षकार के टीम ने मृतक के परिवहन में सहायता करने के लिए भी तैयार थी लेकिन परिवादिनी द्वारा आवश्यक दस्तावेज समय पर प्रदान नहीं किये गये और मेसर्स एयर रेस्कूअरस वल्ड वाइड प्रा. लि. की पहले से प्रतिबद्धता होने के कारण वहां से जाना पड़ा।
आयोग के सामने मुख्य कानूनी प्रश्न
क्या वास्तव में खराब मौसम के कारण उड़ान रद्द हुई?
क्या एयर एम्बुलेंस सेवा में कमी (Deficiency in Service) सिद्ध हुई?
इस संबंध में, परिवादिनी ने बिलासा देवी केवट बिलासपुर के एयरपोर्ट डॉयरेक्टर एन.वीरेन सिंह द्वारा जारी पत्र की प्रति प्रस्तुत की गई है। जिसमें परिवादिनी द्वारा पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को की गई शिकायत के संबंध में एयरपोर्ट डायरेक्टर द्वारा तथ्यात्मक जानकारी प्रदान की गई है जो निम्नानुसार हैः-
“उपरोक्त विषय के संबंध में दिनांक 12.07.2025 को नियमित फ्लाइट ऑपरेशन 13ः45 बजे पर बंद हो जाता है। मेडिकल फ्लाईट लैंडिंग के लिए स्पेशल एयरपोर्ट ऑपरेशन 15ः30 बजे खोला गया।
फ्लाईट लैंडिंग के पश्चात् फ्लाईट क्रू के द्वारा बताया गया कि दिल्ली का मौसम खराब होने के कारण आज दिल्ली के लिये उड़ान नहीं भर पायेंगे जिसके संबंध में संबंधित एयरलाइन ने 12.07.2025 को समय 20ः15 बजे मेल के द्वारा संसोधित प्रोग्राम भेजा गया जिसमें बताया गया कि, यह फ्लाईट दिनांक 13.07.2025 को सुबह 10ः00 बजे जाएगी (पत्र संलग्न)।
इसके बाद संबंधित एयरलाइन्स ने मेल के द्वारा 13.07.2025 समय 11ः10 बजे संसोधित प्रोग्राम भेजा जिसमें बताया कि फ्लाइट दोपहर 15ः00 बजे जाएगी।
इसके बाद 13.07.2025 को दोपहर 16ः06 बजे संबंधित एयरलाइन्स ने मेल के क्षरा बताया कि ग्राहक द्वारा उचित दस्तावेज नहीं प्रदान करने के कारण फ्लाइट आज नहीं जा पाएगी, अगले दिन (दिनांक 14.07.2025) को फ्लाइट जाने का प्रोग्राम शाम तक भेजा जाएगा (पत्र संलग्न)। तत्पश्चात् एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया।
जिसके पश्चात् संबंधित एयलाइन्स ने संसोधित प्रोग्राम भेजा जिसमें बताया गया कि इस फ्लाइट 14.07.2025 को दोपहर 13ः30 बजे जाने के लिए अनुरोध किया गया। यह फ्लाइट दिनांक 14 जुलाई 2025 को दोपहर 13ः42 बजे बिलासपुर एयरपोर्ट से रांची के लिए उड़ान भरी ”
आयोग मतानुसार, अभिलेख पर उपलब्ध एयरपोर्ट डायरेक्टर बिलासपुर द्वारा प्रदत्त पत्र से स्पष्ट होता है कि दिनांक 12.07.2025 को उडान निरस्त होने के पश्चात् विरोधी पक्षकार द्वारा लगातार संशोधित कार्यक्रम प्रेषित किए गए। प्रारंभ में उड़ान को दिनांक 13.07.2025 को सुबह 10 बजे तत्पश्चात् उसी दिन 11ः10 बजे फिर दोपहर 15 बजे तथा बाद में अन्य तिथियों हेतु पुनः निर्धारित किया गया।
यदि वास्तविक कारण केवल मौसम की प्रतिकूलता होती तो उड़ान कार्यक्रम में बार-बार संशोधन का आवश्यकता नहीं प्रतीत होती। संशोधित कार्यक्रमों की यह श्रृंखला दर्शाती है कि विरोधी पक्षकार स्वयं उड़ान संचालन के संबंध में अनिश्चित था तथा समयबद्ध एवं अपेक्षित सेवा प्रदान करने में असफल रहा है जो विरोधी पक्षकार की सेवा में कमी को परिलक्षित करती है।
RTI और एयरपोर्ट रिकॉर्ड से क्या हुआ खुलासा?
यह भी उल्लेखनीय है कि, परिवादिनी द्वारा प्रस्तुत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा आर.टी.आई. से प्राप्त जानकारी में यह स्पष्ट उल्लेख है कि **There where normal operations on 12-07-2025 from 17:00 hrs. to 22:00 hrs. as per the WSO Logvook” अर्थात् दिनांक 12.07.2025 को शाम 05 बजे से रात 10 बजे तक आई.जी.आई. एयरपोर्ट दिल्ली में सामान्य संचालन था।
हमारे मतानुसार, परिवादिनी द्वारा प्रस्तुत भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेश दिनांक 03.10.2025 से यह तथ्य स्थापित होता है दिनांक 12.07.2025 को सायं 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक आई.जी.आई.एयरपोर्ट नई दिल्ली में विमान संचालन सामान्य था।
उक्त आदेश में कहीं भी मौसम खराब होने अथवा मौसम के कारण उड़ान संचालन बाधित होने का उल्लेख नहीं किया गया है।
अतः विरोधी पक्षकार द्वारा एयर एंबुलेंस उड़ान संचालित न किये जाने के लिए लिया गया खराब मौसम का आधार उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्य से पुष्ट नहीं होता है। इससे यह प्रतीत होता है कि विरोधी पक्षकार का उक्त बचाव विश्वसनीय नहीं है एवं सेवा में कमी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) के फैसलों का हवाला
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नई दिल्ली द्वारा पारित आदेश एयर एंबुलेंस एवीएशन और अन्य विरूद्ध गुलनाज बानो और अन्य पुनरीक्षण याचिका संख्या 256/2018 आदेश दिनांक 02.01.2025 अवलोकनीय हैः-
Consumer Protection Act, 1986 — Deficiency in Service — Air Ambulance Services — Petitioner failed to provide promised air ambulance service despite receiving full payment, causing significant distress and risk to a critically ill patient — Repeated postponements, vague assurances, and offering an unsuitable commercial flight constituted deficiency in service by the Petitioner.
विरोधी पक्षकार द्वारा एयर एंबुलेंस उड़ान संचालित न किये जाने के लिए लिया गया खराब मौसम एवं मरीज की गंभीर स्थिति का आधार उपलब्ध अभिलेखी साक्ष्य से प्रमाणित नहीं होता है।
इसके विपरीत विरोधी पक्षकार द्वारा समय पर एयर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध न कराये जाने के कारण मरीज को निर्धारित समय पर दिल्ली स्थित चिकित्सालय में भर्ती होने का अवसर प्राप्त नहीं हो सका परिणामस्वरूप उसकी चिकित्सा में विलंब हुआ तथा दिनांक 13.07.2025 को उसकी मृत्यु हो गयी।
ऐसी स्थिति में कहा जा सकता है कि विरोधी पक्षकार की लापरवाही एवं सेवा में कमी के कारण मरीज एक संभावित एवं समायोचित उन्नत चिकित्सा उपचार प्राप्त करने के अवसर से वंचित हो गया जिससे उसके जीवन की रक्षा की संभावना प्रभावित होना दर्शाती है।
यद्यपि मृत्यु और सेवा में कमी के मध्य प्रत्यक्ष कारण- परिणाम संबंध का चिकित्सकीय निर्धारण इस आयोग का विषय नहीं है, तथापि यह भी निर्विवाद है कि विरोधी पक्षकार की लापरवाही एवं सेवा में कमी के कारण मरीज को समय पर अपेक्षित चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने का अवसर अवश्य बाधित हुआ। अतः विरोधी पक्षकार सेवा में कमी के लिए उत्तरदायी है।
आयोग का अंतिम फैसला (Final Order)
उपरोक्त संपूर्ण विवेचना एवं निष्कर्षो एवं निर्दिष्ट न्याय दृष्टांतों के आधार पर परिवादिनी अपना परिवाद अधिसंभाव्यता की प्रबलता से साबित करने में सफल रही है। फलतः हम यह परिवाद वांछित अनुतोष हेतु स्वीकृति योग्य पाते है।
अतः विचारणीय बिन्दु पर निष्कर्ष हम प्रमाणित है में देते हुए परिवाद स्वीकार कर विरोधी पक्षकार के विरूद्ध निम्नलिखित निर्देशयुक्त आदेश पारित करते हैः-
(अ) विरोधी पक्षकार आदेश की प्रति प्राप्ति की तिथि से 45 दिवस की अवधि के भीतर परिवादिनी द्वारा एयर एंबुलेंस सेवा हेतु जमा की गई अग्रिम राशि 7,50,000/-रूपये (सात लाख पचास हजार रूपये) परिवादिनी को भुगतान करेगा।
विरोधी पक्षकार परिवादिनी को उक्त राशि पर परिवाद प्रस्तुति दिनांक 23.09.2025 से अदायगी दिनांक तक 09ः वार्षिक की दर से साधारण ब्याज की राशि पृथक से भुगतान करेगा।
(ब) विरोधी पक्षकार आदेश की प्रति प्राप्ति की तिथि से 45 दिवस की अवधि के भीतर परिवादिनी को मानसिक अभित्रास के प्रतिकर के रूप में रूपये 25,000/-रूपये (पच्चीस हजार रूपये) एवं वाद व्यय रूपये 5,000/-रूपये (पांच हजार रूपये) भी पृथक से भुगतान करेगा।
सेवा में कमी (Deficiency in Service) से जुड़े उपभोक्ता अधिकार
निष्कर्ष
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि एयर एम्बुलेंस सेवा में कमी जैसे मामलों में सेवा प्रदाता केवल मौसम या अन्य सामान्य कारणों का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। यदि उपभोक्ता से अग्रिम राशि प्राप्त करने के बावजूद समय पर और वादा के अनुरूप सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती तथा उपलब्ध साक्ष्य सेवा में लापरवाही को सिद्ध करते हैं, तो इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना जाएगा।
इस मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने अग्रिम राशि की वापसी, ब्याज, मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा और वाद व्यय प्रदान कर यह संदेश दिया है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में लापरवाही करने वाले सेवा प्रदाताओं को जवाबदेह ठहराया जाएगा। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है।