Brijmohan Bolar Vs. Mahamaya Patho & Diagnostic Lab 2025

उपभोक्ता विवाद: Brijmohan Bolar Vs. Mahamaya Patho & Diagnostic Lab 2025

उपभोक्ता परिवाद क्रमांक: DC/375/CC/19/2022 आदेश पारित दिनांक: 07-11-2025 न्यायालय: जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर (छ.ग.)


1. मामले के तथ्य और घटनाक्रम (Facts and Events)

यह परिवाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत बृजमोहन बोलर द्वारा महामाया पैथो एण्ड डायगोसिक लेब के विरुद्ध दायर किया गया था, जिसमें उन पर ब्लड और यूरिन टेस्ट की गलत रिपोर्ट प्रदान करके सेवा में कमी करने का आरोप लगाया गया था।

  • परिवादी का दावा: परिवादी ने आरोप लगाया कि विरोधी पक्षकार की 19.10.2021 की रिपोर्ट में उनका क्रिएटिनिन (Creatinine) स्तर 10.36 mg/dL दर्शाया गया, जो कि अत्यधिक उच्च होता है और गंभीर किडनी फेल्योर का संकेत देता है, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी हुई।
  • अन्य टेस्ट: इस रिपोर्ट के तीन दिन बाद, यानी 22.10.2021 को, परिवादी ने अपोलो हॉस्पिटल, बिलासपुर में दोबारा टेस्ट कराया, जिसमें उनका क्रिएटिनिन स्तर 1.62 mg/dL पाया गया, जो सामान्य के करीब था। इस बड़े अंतर के कारण परिवादी ने लैब पर गलत रिपोर्ट देने का आरोप लगाया।
  • विरोधी पक्षकार का तर्क (Lab’s Defence): विरोधी पक्षकार ने तर्क दिया कि क्रिएटिनिन का स्तर केवल किडनी फेल्योर के कारण ही नहीं बढ़ता है। यह मांसपेशियों की समस्या, निर्जलीकरण (Dehydration), तेज बुखार, अधिक व्यायाम या लाल मांस जैसे अधिक प्रोटीन का सेवन करने से भी हो सकता है।
  • रिपोर्ट के अंतर पर तर्क: लैब ने बताया कि 19.10.2021 की रिपोर्ट के बाद परिवादी द्वारा डॉक्टर की सलाह से दवाईयों का सेवन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 3 से 4 बार मूत्र त्याग हुआ, जिससे अपोलो की रिपोर्ट (जो 3 दिन बाद की थी) में अंतर आना संभव है। उनका मत था कि यदि परिवादी ने उसी दिनांक को किसी अन्य लैब से टेस्ट कराया होता और रिपोर्ट में अंतर आता, तो ही सेवा में कमी मानी जाती।

2. पक्षकार एवं अधिवक्ता (Parties and Advocates)

भूमिका (Role)नाम (Name)अधिवक्ता (Advocate)
परिवादी (Complainant)बृजमोहन बोलर, उम्र-46 वर्षश्री प्रकाश मिश्रा
विरोधी पक्षकार (Opposite Party)अरूण चौबे (संचालक, महामाया पैथो एण्ड डायगोसिक लेब)श्री टी. आरिफ

3. न्यायपीठ के सदस्य (Members of the Bench)

यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर (छ.ग.) के निम्नलिखित न्यायपीठ द्वारा पारित किया गया:

  • माननीय आनंद कुमार सिंघल, अध्यक्ष
  • माननीय श्रीमती पूर्णिमा सिंह, सदस्य (इनके द्वारा आदेश पारित किया गया)
  • माननीय आलोक कुमार पाण्डेय, सदस्य

4. निष्कर्ष, आदेश और महत्वपूर्ण उद्धरण (Conclusion, Order, and Key Finding)

निष्कर्ष (Conclusion)

न्यायालय ने विरोधी पक्षकार के तर्क को स्वीकार किया कि दवाईयों के सेवन और तीन दिन के समय अंतराल के कारण रिपोर्ट के रीडिंग्स में बदलाव आना संभव है, और यह भी कि ब्लड के सैंपल लेने के समय और दवाईयों के सेवन के पश्चात् हर घंटे में रीडिंग अलग-अलग आ सकती है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (Key Finding/Rationale)

आयोग ने पाया कि विरोधी पक्षकार द्वारा परिवादी के विरूद्ध सेवा में कमी किया जाना साबित नहीं होता है।

हमारे मतानुसार यदि परिवादी द्वारा विरोधी पक्षकार से रिपोर्ट प्राप्त पश्चात् उक्त दिनांक को ही अन्य किसी लैब में टेस्ट कराता और उस रिपोर्ट में अंतर आता तो उक्त स्थिति में विरोधी पक्षकार की सेवा में कमी मानी जाती किंतु 03 दिन पश्चात् अपोलो हॉस्पिटल की जो रिपोर्ट है उसमें भी यूरिन टेस्ट नॉर्मल होने कारण सामान्यतः किसी भी ब्लड के सैंपल लेने के समय एवं दवाईयों के सेवन के पश्चात् हर घण्टे में रीडिंग पृथक-पृथक आती है।”

आदेश (Order)

उपरोक्त विवेचना और विधिक विश्लेषणों के आधार पर, आयोग ने परिवादी के परिवाद को अस्वीकृति योग्य मानते हुए खारिज (Dismissed) कर दिया।

  • उभयपक्ष को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का आदेश दिया गया।

5. उपभोक्ताओं के लिए संदेश (Message for Consumers)

चिकित्सा परीक्षणों में विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए, किसी भी असामान्य या गंभीर रिपोर्ट की पुष्टि तत्काल किसी अन्य प्रतिष्ठित लैब से कराएं और हमेशा टेस्ट के परिणामों पर चर्चा करने के लिए किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

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