पुरानी कार खरीद में धोखाधडी – बिलासपुर आयोग का फैसला ! Consusmer Awareness news 2025

पुरानी कार खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी!

बिलासपुर आयोग का फैसला

पुरानी कार खरीद में धोखाधडी – बिलासपुर आयोग का फैसला ! Consusmer Awareness news 2025 (छत्तीसगढ़) ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए उपभोक्ता प्रकाश विधानी के पक्ष में फैसला सुनाया है।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बिलासपुर में एक प्रकरण संख्या DC/375/CC/262/2021 प्रकाश विधानी विरुद्ध टी.वी.एस. क्रेडिट सर्विस लिमिटेड (TVS Credit Service Ltd) का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें उपभोक्ता को पुरानी कार खरीद में धोखाधड़ी और भ्रामक जानकारी का सामना करना पड़ा।

जिला उपभोक्ता आयोग बिलासपुर के अध्यक्ष माननीय श्री आनंद कुमार सिंघल, सदस्य – श्रीमती पुर्णिमा सिंह, श्री आलोक कुमार पाण्डेय द्वारा अपने आदेश में कहा गया कि विरोधी पक्ष ने जानबूझकर उपभोक्ता को झूठी और भ्रामक जानकारी दी तथा वाहन की वास्तविक स्थिति छिपाई। इसलिए यह कृत्य उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापारिक आचरण (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।

कंपनी ने छुपायी सच्चाई – पुरानी कार खरीद में उपभोक्ता के साथ छल

परिवादी श्री प्रकाश विधानी (आयु 40 वर्ष), निवासी राजौरा, बिलासपुर ने विरोधी पक्ष टी.वी.एस. क्रेडिट सर्विस लिमिटेड से एक पुरानी स्कोडा कार (RC No- CG07 CA 0525) खरीदी थी। गाड़ी की कुल कीमत 4,30,000/- तय हुई, जिसमें से 2,00,000/- नगद और शेष 2,30,000/- RTGS के माध्यम से दिनांक 29 अप्रैल 2018 को भुगतान किया गया। विरोधी पक्ष ने गाड़ी के साथ सभी दस्तावेज RC Book, Insurance Policy, Form 29 और 30 (नाम ट्रांसफर हेतु) प्रदान किए। उपभोक्ता को यह बताया गया कि वाहन किसी भी प्रकार के भार या ऋण से मुक्त है।

Blacklisted वाहन की सच्चाई उजागर

जब उपभोक्ता ने वाहन अपने नाम पर ट्रांसफर कराने के लिए RTO कार्यालय, दुर्ग का रुख किया, तब एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। पता चला कि उक्त वाहन पर रोड टैक्स (Road Tax) बकाया था और उसे ब्लैक लिस्टेड (Blacklisted) घोषित किया गया था। साथ ही, वाहन टी.वी.एस. क्रेडिट सर्विस लिमिटेड के नाम पर Hypothecation (वित्तीय गिरवी) में था, जिसका लोन पूरी तरह चुकाया नहीं गया था। उपभोक्ता ने यह जानकारी कंपनी को दी, परंतु कंपनी ने झूठा आश्वासन दिया कि वाहन पूरी तरह “Free from all dues” है। यह जानकारी गलत निकली और उपभोक्ता को गाड़ी ट्रांसफर कराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

उपभोक्ता ने की शिकयत – न्याय की राह पर संघर्ष

प्रकाश विधानी ने पहले अपने स्तर पर समस्या का समाधान करने की कोशिश की। उन्होंने 13 मार्च 2019 को कंपनी को एक Legal Notice (पंजीकृत डाक से) भेजा, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। इसके बाद, उन्होंने 10 जुलाई 2019 को पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर एवं पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को शिकायत दी। फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। अंततः उन्होंने 16 दिसंबर 2019 को पुनः एक नोटिस भेजा और बाद में मामला जिला उपभोक्ता आयोग बिलासपुर में दर्ज किया।

बिलासपुर आयोग में सुनवाई,  दस्तावेज़ों ने खोली सच्चाई – बिलासपुर आयोग का फैसला

बिलासपुर आयोग के समक्ष दोनों पक्षों के दस्तावेज़ों की जांच की गई। सुनवाई के दौरान यह प्रमाणित हुआ कि वाहन “Vatuh Corporation” के नाम पर फाइनेंस में था और टी.वी.एस. क्रेडिट सर्विस ने उसका ऋण पूर्ण रूप से क्लियर नहीं किया था।वाहन का विवरण RTO वेबसाइट से भी प्राप्त किया गया, जिसमें लिखा था  – “Blacklisted by Durg RTO due to FIR No – 593/18 dated 21-12-2018, Police Station Jamul” यह साफ हो गया कि जिस वाहन को उपभोक्ता को बेचा गया था, वह FIR में दर्ज और Blacklisted Vehicle था। कंपनी ने यह महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया और भ्रामक जानकारी देकर उपभोक्ता को गुमराह किया।

बिलासपुर आयोग का आदेश – उपभोक्ता को 4,45000/- रुपये लौटने का आदेश

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि विरोधी पक्ष का व्यवहार पूरी तरह से अनुचित था।

टी.वी.एस. क्रेडिट सर्विस लिमिटेड को निम्नलिखित आदेश दिए गए

1.    विरोधी पक्ष 45 दिनों के भीतर उपभोक्ता को ₹4,30,000/- की पूरी राशि लौटाए।

2.    यदि राशि निर्धारित समय पर नहीं लौटाई जाती है तो उस पर 9ः वार्षिक ब्याज लगाया जाएगा (दिनांक 03.12.2021 से भुगतान की तिथि तक)।

3.    उपभोक्ता को मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए ₹10,000/- तथा विधिक खर्च के रूप में ₹5,000/- अतिरिक्त दिए जाएंगे।

बिलासपुर आयोग ने कहा – सेवा में कमी का मामला स्पष्ट

“सेवा प्रदाता का यह कृत्य उपभोक्ता के साथ विश्वासघात के समान है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत यह सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक आचरण है।”

उपभोक्ताओं के लिए सीख – पुरानी गाड़ी खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें

यह मामला उपभोक्ताओं के लिए एक चेतावनी है कि पुरानी गाड़ी खरीदने से पहले जांच-पड़ताल जरूर करें, सिर्फ गाड़ी की बाहरी स्थिति देखकर फैसला न लें, बल्कि निम्न बिंदुओं पर ध्यान दें –

1.    सभी दस्तावेजों की जांच करें

RC Book, Insurance, NOC, Loan Clearance Certificate, Pollution Certificate आदि की वैधता RTO Parivahan.gov.in पर जांचें।

2.    वाहन की Blacklist या FIR स्थिति देखें

RTO या पुलिस वेबसाइट पर जाकर यह सुनिश्चित करें कि वाहन किसी FIR या ब्लैकलिस्ट में शामिल नहीं है।

3.   Written Declaration लें

विक्रेता या कंपनी से लिखित रूप में गारंटी लें कि वाहन पर कोई लोन, टैक्स या पेंडिंग केस नहीं है।

4.    भुगतान केवल बैंक ट्रांसफर से करें

RTGS, NEFT या ऑनलाइन पेमेंट करें ताकि ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।

5.    उपभोक्ता आयोग में शिकायत करने का अधिकार

यदि आपको धोखा मिलता है, तो Consumer Protection Act 2019 के तहत आप जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत के लिए https://e-jagriti.gov.in पोर्टल का उपयोग करें।

निष्कर्ष

यह केस सिर्फ प्रकाश विधानी की जीत नहीं, बल्कि देशभर के उपभोक्ताओं के लिए एक जागरूकता संदेश है। आयोग के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया कि “कोई भी कंपनी या डीलर अगर उपभोक्ता से सच्चाई छिपाकर भ्रामक जानकारी देता है, तो उसे न केवल राशि लौटानी होगी बल्कि मानसिक क्षति का मुआवजा भी देना पड़ेगा।” ऐसे मामलों से यह सिद्ध होता है कि उपभोक्ता जागरूकता (Consumer Awarenes) ही सबसे बड़ा हथियार है। अगर उपभोक्ता अपने अधिकारों को पहचानें, तो किसी भी धोखाधड़ी का शिकार होने से बचा जा सकता है।

आदेश की प्रति

पूरा आदेश पूरा पढ़ने के लिए क्लिक करें-

प्रकाश विधानी विरुद्ध टी.वी.एस. क्रेडिट सर्विस लिमिटेड

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