बिलासपुर (छ.ग.) के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा राम नारायण साहू बनाम श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (प्रकरण क्रमांक CC/2019/79) के मामले में दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले पर आधारित है । यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बीमा कंपनियाँ केवल तकनीकी आधार पर, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस पर विशिष्ट एंडोर्समेंट की कमी, वैध दावों को खारिज नहीं कर सकती हैं ।
मामले की पृष्ठभूमि
परिवादी राम नारायण साहू (अब उनके कानूनी वारिस) के पास एक ‘हल्का सवारी परिवहन वाहन’ (LMV Maxi Cab) था, जिसका बीमा श्रीराम जनरल इंश्योरेंस से कराया गया था । 10 सितंबर 2018 को यह वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया । परिवादी ने वाहन के सुधार के लिए 2,82,426 रुपये खर्च होने का दावा किया और बीमा कंपनी को सूचित किया ।
विवाद का मुख्य कारण
बीमा कंपनी ने 21 नवंबर 2018 को दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय चालक के पास वाहन चलाने के लिए ‘वैध और प्रभावी’ लाइसेंस नहीं था । कंपनी का तर्क था कि वाहन एक ‘परिवहन श्रेणी’ (Transport Category) का था, जबकि चालक के पास केवल ‘LMV (Non-Transport)’ श्रेणी का लाइसेंस था । इस आधार पर कंपनी ने इसे पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन माना ।
आयोग का विश्लेषण और कानूनी आधार
आयोग ने मामले की गंभीरता से समीक्षा की और निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
- लाइसेंस की वैधता: आयोग ने पाया कि परिवादी के पास ‘हल्का मोटरयान’ (LMV) का लाइसेंस था जो 2024 तक वैध था ।
- सुप्रीम कोर्ट का मार्गदर्शक सिद्धांत: आयोग ने मुकुन्द देवांगन बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2017) के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया । इस सिद्धांत के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पास ‘हल्का मोटरयान’ श्रेणी का वैध लाइसेंस है, तो उसे उसी श्रेणी के परिवहन वाहन चलाने के लिए अलग से एंडोर्समेंट (पृष्ठांकन) की आवश्यकता नहीं है ।
- क्षति का मूल्यांकन: हालांकि परिवादी ने 2.8 लाख रुपये से अधिक का दावा किया था, लेकिन सर्वेयर की रिपोर्ट में क्षति का वास्तविक आकलन 45,714 रुपये किया गया था । आयोग ने सर्वेयर की रिपोर्ट को विश्वसनीय माना ।
आयोग का अंतिम आदेश
आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा सेवा में कमी पाते हुए परिवाद को स्वीकार कर लिया । 27 जून 2024 को पारित आदेश के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- क्षतिपूर्ति: बीमा कंपनी को वाहन क्षति के लिए 45,714 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया ।
- ब्याज: इस राशि पर परिवाद प्रस्तुति की तिथि (05.04.2019) से भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा ।
- मानसिक क्षति और वाद व्यय: मानसिक परेशानी के लिए 10,000 रुपये और कानूनी खर्च (वाद व्यय) के लिए 5,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का निर्देश दिया गया ।
निष्कर्ष
यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह रेखांकित करता है कि यदि वाहन चालक के पास संबंधित श्रेणी का वैध लाइसेंस है, तो बीमा कंपनी तकनीकी पेचीदगियों का सहारा लेकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती है।