सुश्री शेख शबाना विरुद्ध बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

यह लेख जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, महासमुंद द्वारा सुश्री शेख शबाना विरुद्ध बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के मामले (शिकायत संख्या DC/385/CC/4/2025) में दिए गए फैसले का सारांश है । परिवादी शेख शबाना ने जून 2022 में एक होंडा एक्टिवा स्कूटी खरीदी थी, जिसका बीमा विपक्षी कंपनी से कराया गया था । 29 मई 2024 की रात को घर के बाहर खड़ी गाड़ी में तकनीकी खराबी के कारण अचानक आग लग गई, जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) स्थानीय थाने में दर्ज कराई गई । परिवादी द्वारा बीमा दावा करने पर कंपनी के सर्वेयर ने जांच तो की, लेकिन अंततः ‘मैन्युफैक्चरर टेक्निकल रिपोर्ट’ (Manufacturer Technical Report) उपलब्ध न कराने के आधार पर 02 जनवरी 2025 को दावा खारिज कर दिया गया ।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा ऐसी तकनीकी रिपोर्ट की मांग करना अनुचित था, क्योंकि यह उपभोक्ता के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता । आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ऐसी रिपोर्ट आवश्यक थी, तो बीमा कंपनी स्वयं निर्माता या डीलर से संपर्क कर इसे प्राप्त कर सकती थी । कंपनी द्वारा इस आधार पर दावा निरस्त करना ‘सेवा में कमी’ की श्रेणी में माना गया । यद्यपि परिवादी ने वाहन की मूल कीमत के रूप में ₹96,000 की मांग की थी, लेकिन आयोग ने पॉलिसी में उल्लेखित वाहन के घोषित मूल्य (IDV) ₹60,943 को ही उचित क्षतिपूर्ति माना ।

अध्यक्ष श्री गोपाल रंजन पाणिग्राही और सदस्य श्री गिरीश श्रीवास्तव की पीठ ने 11 दिसंबर 2025 को आदेश पारित करते हुए बीमा कंपनी को निर्देशित किया कि वह 45 दिनों के भीतर परिवादी को ₹60,943 की बीमा राशि का भुगतान करे । साथ ही, आयोग ने परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि (19/02/2025) से भुगतान की तिथि तक 6% वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया । इसके अतिरिक्त, परिवादी को हुई मानसिक पीड़ा के लिए ₹10,000 और कानूनी वाद व्यय के रूप में ₹5,000 देने का आदेश भी जारी किया गया । यह फैसला स्पष्ट करता है कि बीमा कंपनियां तकनीकी दस्तावेजों का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं के न्यायसंगत दावों को नहीं रोक सकतीं ।

“ऑर्डर की प्रमाणित प्रति डाउनलोड करने के लिए ‘सुश्री शेख शबाना विरुद्ध बजाज एलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड’ पर क्लिक करें।”

 

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