Nishank Shukla vs Oriental Insurance उपभोक्ता को मिला न्याय : Chhattisgarh Consumer Commission Judgement 2025

Chhattisgarh Consumer Commission Judgement 2025: का यह मामला उन सभी उपभोक्ताओं के लिए मिसाल बन गया है जो बीमा कंपनियों के अनुचित रवैये से परेशान है। यह केस ‘Nishank Shukla बनाम The Oriental Insurance Company Limited‘ से जुड़ा है, जिसमें उपभोक्ता को आखिरकार न्याय मिला। उत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग, रायपुर ने 9 अक्टूबर 2025 को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

Chhattisgarh Consumer commission Judgement 2025

Chhattisgarh Consumer Commission Judgement 2025 : उपभोक्ता अधिकारों की जीत की कहानी

मामले की पृष्ठभूमि (Background of the Case)

इस कहानी की शुरुआत होती है सरगुजा जिले के एक ट्रक मालिक निशांक शुक्ला से, उन्होंने अपने वाहन Tata Signa Truck (CG-15-DJ-6485) का बीमा The Onental Insurance Company Limited से कराया था। बीमा अवधि 10 जुलाई 2019 से 9 जुलाई 2020 तक वैध थी। लेकिन 27 दिसंबर 2019 को ट्रक में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई और वाहन पूरी तरह जल गया।

शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी और पुलिस दोनों को तुरत सूचना दी। बीमा कंपनी ने सर्वेयर भेजा जिसने नुकसान का आकलन 22,75,729 बताया। लेकिन कुछ महीनों बाद कंपनी ने दावा खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि national permit authorization दुर्घटना के दिन वैध नहीं था। यह कहते हुए बीमा क्लेम को अस्वीकार कर दिया गया जो उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन था।

District Commission का निर्णय

निशांक शुक्ला ने न्याय पाने के लिए District Consumer Disputes Redressat Commission, Ambikapur (Surguja) में शिकायत दर्ज की। 16 अप्रैल 2025 को आयोग ने फैसला सुनाया कि बीमा कंपनी को ₹15,01,375/- मुआवजा और 6% ब्याज देना होगा। साथ ही कहा गया कि यदि कंपनी ने 45 दिनों में भुगतान नहीं किया, तो ब्याज दर 8% प्रति वर्ष हो जाएगी।
यह फैसला उपभोक्ता के पक्ष में था लेकिन शिकायतकर्ता का कहना था कि वास्तविक नुकसान ₹29,07,000/- (IDV) के बराबर था. इसलिए उन्होंने State Commission में अपील दायर की।

State Consumer Commission Raipur में अपील

इस अपील की सुनवाई Chhattisgarh State Consumer Commission Raipur में हुई। इस बैंच में माननीय न्यायमूर्ति श्री गौतम चौरड़िया (अध्यक्ष्य) और श्री प्रमोद कुमार वर्मा (सदस्य) छ ग राज्य उपभोक्ता आयोग रायपुर शामिल थे।
शिकायतकर्ता की ओर से श्री मनीष निगम, एडवोकेट और बीमा कंपनी की ओर से श्री राज अवस्थी, एडवोकेट उपस्थित रहे।

निशाक शुक्ला का कहना था कि सर्वेयर ने भी नुकसान 22,75,729/ आका था, और IDV 229,07,000/ था। लेकिन फिर भी बीमा कंपनी ने मनमाने ढंग से केवल आधा भुगतान किया। उन्होंने यह भी कहा कि District Commission ने बिना कारण राशि घटाई है।

Court का अवलोकन (Observation of Chhattisgarh Consumer Commission Judgement 2025)

State Commission ने पूरे रिकॉर्ड का परीक्षण किया और पाया कि बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज किया कि permit authonzation वैध नहीं था। लेकिन वाहन छत्तीसगढ राज्य की सीमा के भीतर था, इसलिए कोई अतिरिक्त authorization की आवश्यकता नहीं थी।

इस संदर्भ में आयोग ने Supreme Court के निर्णय- Binod Kumar Singh vs National Insurance Co. Ltd. (SLP Civil No. 13060 of 2020, 2025 INSC 154)” का उल्लेख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि जब वाहन उसी राज्य में चल रहा हो जहाँ से permit जारी हुआ है. तो authorization fee का नवीनीकरण जरूरी नहीं। इसलिए बीमा कंपनी ‌द्वारा दिया गया कारण “फ्रिवोलस” यानी निराधार था। यह बात Chhattisgarh State Consumer Commission में दोहराई गई कि बीमा कंपनी ने अनु‌चित रूप से उपभोक्ता का दावा खारिज किया।

Final Decision: उपभोक्ता को पूरा मुआवजा मिला।

State Commission ने यह माना कि District Commission ने शिकायतकर्ता का दावा “non standard basis” पर तय कर गलती की। सर्वेयर ने स्वयं रिपोर्ट में लिखा था कि ‘venicte repair basis settlement is out of scope यानी वाहन की मरम्मत संभव नहीं थी और यह total loss case था।

राज्य आयोग के आदेश

अगर शिकायतकर्ता salvage (जला हुआ वाहन) अपने पास रखता है, तो बीमा कंपनी ₹25,05,500/- का भुगतान करेगी अगर शिकायतकर्ता salvage नहीं रखना चाहता, तो कपनी 29,05,500 /- का भुगतान करेगी और salvage अपने पास लेगी। इसके साथ आयोग ने कहा कि यह Chhattisgarh Consumer Commission Judgement 2025 उपभोक्ता अधिकार को मजबूत करने वाला फैसला है।

आदेश देखने के लिए download पर क्लीक करें

यह निर्णय भारतीय उपभोक्ता कानून और बीमा विवादों के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है। Consumer Protection Act, 2019 की धारा 41 के तहत उपभोक्ता को यह अधिकार है कि वह District Commission के निर्णय के खिलाफ State Commission में अपील कर सके।

Chhattisgarh Consumer Commission Judgement 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि बीमा कपनियाँ बिना वैध कारण किसी क्लेम को अस्वीकार नहीं कर सकती।

Permit Expiry Ground Invalid अगर वाहन उसी राज्य में चल रहा हो, जहाँ perimit जारी हुआ है, तो बीमा कंपनी permit expiry का हवाला देकर क्लेम नहीं रोक सकती।

2. IDV (Insured Declared Value) बीमा पॉलिसी में जो IDV लिखा है वाही मान्य होगा सर्वेयर उसे घटा नहीं सकता।

3. Total Loss Concept जब मरम्मत की लागत वाहन के मूल्य से अधिक हो तो उपभोक्ता को पूर्ण मुआवजा मिलना चाहिए।

4. Consumer Empowerment यह फैसला दिखाता है कि Chhattisgarh Consumer Court Judgement 2025 उपभोक्ताओं के लिए न्याय का मजबूत उदाहरण है।

इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि उपभोक्ता को अपने अधिकारों की जानकारी होना जरुनी है। बीमा कंपनियां technical कारणों का दुरुपयोग कर उपभोक्ता के साथ अन्याय नहीं कर सकती। यदि कोई क्लेम गलत तरीके से अस्वीकार किया जाए, तो उपभोक्ता District Forum. State Commission, या National Commission तक जा सकता है।

Chhattisgarh Consumer Court Judgement 2025″ जैसे निर्णय उपभोक्ताओं को यह भरोसा दिलाते हैं कि कानून उनके साथ है।

Conclusion:

A Landmark Consumer Judgement Chhattisgarh Consumer Commission Judgement 2025 (Nishank Shukla vs Oriental Insurance) ने यह साबित कर दिया कि न्याय देर से मिल सकता है, लेकिन मिलेगा जरूर। यह फैसला न सिर्फ शिकायतकर्ता के लिए राहतभरा है, बल्कि उन सभी उपभोक्ताओ के लिए मार्गदर्शक है जो बीमा कंपनियों के अनुचित रवैये से लड़ रहे हैं।

Consumer Jagriti वेबसाइट ऐसे ही महत्वपूर्ण मामलों को जनता तक पहुंचाकर उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और जागरुकता बढ़ाने का काम कर रही है।

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