श्रीमती लीलावती पटेल बनाम अधीक्षक मुख्य डॉकघर

रायगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वारा 11 नवंबर 2025 को सुनाया गया निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों और सरकारी विभागों की जवाबदेही को एक बार फिर मजबूत करता है। यह मामला श्रीमती लीलावती पटेल, श्रीमती सिम्मू पटेल और श्रीमती वुजर्का पटेल द्वारा अधीक्षक मुख्य डाकघर, रायगढ़ (छत्तीसगढ़) के विरुद्ध दायर किया गया था।
वादकारियों ने 19 सितंबर 2025 को शिकायत दायर की, जिसकी अंतिम सुनवाई और निर्णय 11 नवंबर 2025 को हुआ। इस पूरे मामले में वर्ष 2005 से 2024 तक की घटनाएँ शामिल हैं, जिनमें डाकघर की गंभीर लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई।
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मामले की शुरुआत -श्रीमती लीलावती पटेल बनाम अधीक्षक मुख्य डॉकघर
मामले की शुरुआत 21 फरवरी 2005 से होती है जब वादकारी क्रमांक 1 के पति, स्वर्गीय धनदयाल पटेल ने मुख्य डाकघर रायगढ़ में पीपीएफ खाता संख्या 110759 खोला था। यह खाता पूरी तरह वैध था और वर्षों तक नियमित रूप से संचालित किया जाता रहा।
खाता खोलते समय डाकघर के कर्मचारी ने इस खाते को एजेंट नंबर 304 के साथ लिंक किया था, लेकिन बाद में यह पाया गया कि डाकघर के रिकॉर्ड में ऐसे किसी एजेंट का कोई सत्यापित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है। इसका अर्थ यह था कि खाता खोलने के समय से ही रिकॉर्डिंग में बड़ी चूक हुई और यह त्रुटि पूरी तरह से डाकघर कर्मचारियों की ओर से थी।
बाद के वर्षों में विशेष रूप से 2015 से 2020 के बीच डाकघर ने डिजिटल रिकॉर्ड के लिए स्कैनिंग और अपडेटिंग का कार्य किया, लेकिन इसी दौरान पीपीएफ खाते को संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड में सही ढंग से अपडेट नहीं किया गया।
वर्ष 2020 में खाता अपडेट होकर नया नंबर 1410640275 बनाया गया, लेकिन इस अपडेटेड खाते में भी एजेंट नंबर 304 का कोई उल्लेख नहीं था। डाकघर की यह गंभीर त्रुटि भविष्य में वादकारियों के लिए समस्या का कारण बनी। 17 जनवरी 2024 को खाता धारक धनदयाल पटेल का निधन हो गया। मृत्यु के बाद वादकारियों ने डाकघर से पीपीएफ की संपूर्ण राशि की मांग की, लेकिन डाकघर ने न केवल भुगतान से इंकार किया बल्कि किसी भी प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध कराने से भी मना कर दिया।
वादकारियों द्वारा विधिक नोटिस देने पर भी डाकघर ने जवाब में केवल यह कहा कि एजेंट नंबर 304 का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और मृत्यु के बाद आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, इसलिए भुगतान संभव नहीं है। लेकिन डाकघर इस तथ्य को सिद्ध नहीं कर सका कि वादकारियों ने कौन सा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया और न ही यह साबित कर सका कि रिकॉर्ड में त्रुटि उपभोक्ता की वजह से हुई है।
वादकारियों ने आयोग के समक्ष यह दावा किया कि खाता धारक की मृत्यु के बाद खाता बंद कर राशि प्राप्त करने की प्रक्रिया में डाकघर ने जानबूझकर देरी की और कई बार प्रयास करने के बावजूद न तो उन्हें सही जानकारी दी गई और न ही खाता का पूरा विवरण प्रदान किया गया। वादकारियों ने मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक हानि तथा मुकदमे का खर्च भी मांगा।
प्रतिवादी डाकघर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वादकारियों ने जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए और एजेंट नंबर 304 का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, इसलिए भुगतान रोकना उचित था। लेकिन आयोग ने डाकघर की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि पीपीएफ खाता 2005 में खुला और नियमित रूप से संचालित होता रहा, जिसे डाकघर स्वयं स्वीकार करता है। खाता धारक के नाम पर जमा की गई राशि डाकघर की अभिरक्षा में थी और उसका भुगतान रोकना पूरी तरह गलत था।
यह भी प्रमाणित हुआ कि एजेंट नंबर 304 का उल्लेख डाकघर के कर्मचारियों ने किया था और यह उनकी गलती थी कि वह बाद में रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं रहा। उपभोक्ता को किसी भी हालत में विभागीय त्रुटि के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। आयोग ने यह भी कहा कि डिजिटल ट्रांजिशन के दौरान रिकॉर्ड अपडेट नहीं होना उपभोक्ता की गलती नहीं बल्कि डाकघर की लापरवाही का प्रमाण है। खाता धारक की मृत्यु के बाद हकदारों को भुगतान में अनावश्यक देरी करना अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी (Deficiency in Service) की श्रेणी में आता है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायगढ़ (छ.ग.) ने प्रकरण क्रमांक CC/2025/98 में श्रीमती लीलावती पटेल व अन्य की शिकायत पर मुख्य डाकघर, रायगढ़ के अधीक्षक के विरुद्ध आदेश पारित किया है। यह परिवाद उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत प्रस्तुत किया गया था।
मामले का सार परिवाद आवेदक संख्या 01 (श्रीमती लीलावती पटेल) के पति और अन्य आवेदकों के पिता, स्व. धनंजय कुमार पटेल के पी.पी.एफ. खाता क्रमांक 1410640275 से संबंधित था। मूल खाता क्रमांक 110759 में आवेदक संख्या 01 को नॉमिनी (संख्या 304) बनाया गया था। डाकघर द्वारा कम्प्यूटराइजेशन के दौरान खाता संख्या बदल दी गई, लेकिन नॉमिनी का उल्लेख पश्चातवर्ती पासबुक में नहीं किया गया। खाताधारक की मृत्यु के बाद, डाकघर ने नॉमिनी से संबंधित दस्तावेज़ न होने का कारण बताते हुए रकम का भुगतान नहीं किया, जिसे आयोग ने कर्मचारी की त्रुटि और लापरवाही मानते हुए ‘सेवा में कमी’ माना।
आयोग का मुख्य आदेश (दिनांक 11/11/2025)
श्रीमती लीलावती पटेल बनाम अधीक्षक मुख्य डॉकघर
श्रीमती वुजर्का पटेल बनाम अधीक्षक मुख्य डॉकघर
श्रीमती सिम्मू पटेल बनाम अधीक्षक मुख्य डॉकघर
आयोग ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए निम्नलिखित आदेश पारित किया:
खाता राशि का भुगतान: अनावेदक (अधीक्षक, मुख्य डाकघर) मृतक धनंजय कुमार पटेल के खाता क्रमांक 1410640275 की संपूर्ण राशि अदायगी दिनांक तक के निर्धारित ब्याज सहित, आदेश दिनांक से 45 दिन के भीतर आवेदक संख्या 01 को प्रदान करेगा।
विलंब की स्थिति में ब्याज: यदि 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो अनावेदक आदेश दिनांक से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करेगा।
क्षतिपूर्ति और वाद व्यय: अनावेदक, आवेदक संख्या 01 को आर्थिक, मानसिक क्षति के रूप में ₹10,000/- और वाद व्यय के रूप में ₹3,000/- भी आदेश दिनांक से 45 दिन के भीतर प्रदान करेगा।
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