सिर्फ Estimate से नहीं बढ़ेगा बीमा क्लेम! छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग का अहम फैसला | FA/24/634

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग का अहम फैसला

रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग का अहम फैसला l बीमा दावा से संबंधित एक महत्वपूर्ण अपील (क्रमांक FA/24/634) में फैसला सुनाते हुए, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर के आदेश की पुष्टि की है। आयोग ने श्रीमती उषा साहू व अन्य (अपीलार्थीगण/परिवादीगण) द्वारा श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (उत्तरवादी/विरुद्ध पक्षकार) के विरुद्ध दायर अपील को सारहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति श्री गौतम चौरड़िया, अध्यक्ष, और माननीय श्री प्रमोद कुमार वर्मा, सदस्य, की पीठ द्वारा 28 नवंबर 2025 को सुनाया गया।

मामला और जिला आयोग का मूल आदेश

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग का अहम फैसला

यह अपील, बिलासपुर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा प्रकरण क्र. CC/2019/79 usa shrivastav vs shri ram general ins. में 27 जून 2024 को पारित आदेश के विरुद्ध दायर की गई थी। मूल परिवाद अपीलार्थिनी क्र.-1 (श्रीमती उषा साहू) के दिवंगत पति रामनारायण साहू के स्वामित्व वाले वाहन (क्रमांक CG 10/S 0389) के बीमा दावे से संबंधित था। यह वाहन बीमा अवधि के दौरान 10 सितंबर 2018 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था ।

बीमा कंपनी (श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड) ने बीमा दावे को शुरू में यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि दुर्घटना के समय चालक (दिवंगत पति) के पास वैध एवं प्रभावी लाइसेंस नहीं था, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन था । हालांकि, जिला आयोग ने इस दावे को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया था:

सर्वेयर द्वारा आंकलित क्षति राशि: ₹45,714/- (पैंतालीस हजार सात सौ चौदह रुपये)।

परिवाद प्रस्तुति दिनांक (05.04.2019) से अदायगी दिनांक तक 9% वार्षिक साधारण ब्याज।

मानसिक क्षतिपूर्ति: ₹10,000/- (दस हजार रुपये)।

वाद व्यय: ₹5,000/- (पांच हजार रुपये)।

जिला आयोग ने यह राशि 45 दिन के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया था ।

अपीलार्थीगण के मुख्य तर्क: अनुमानित क्षतिपूर्ति पर जोर

परिवादीगण (अपीलार्थीगण) ने जिला आयोग के आदेश को अपर्याप्त मानते हुए, इस आधार पर अपील की कि जिला आयोग ने मरम्मत के वास्तविक अनुमानित खर्च पर ध्यान नहीं दिया । अपीलार्थीगण के अधिवक्ता श्री आर. के. भावनानी ने तर्क दिया कि बीमा कंपनी के निर्देशानुसार वाहन को सुधारने का अनुमानित खर्च ₹2,82,426/- (दो लाख बयासी हजार चार सौ छब्बीस रुपये) था । इसमें महिंद्रा केयर का अनुमान (₹1,85,226/-), बैटरी बिल (₹7,200/-) और अन्य डेंटिंग/पेंटिंग का बिल (₹90,000/-) शामिल था । उन्होंने कहा कि यह अनुमानित खर्च सर्वेयर द्वारा आंकलित क्षति राशि (₹45,714/-) से कहीं अधिक था। उनका कहना था कि माननीय जिला आयोग द्वारा केवल सर्वेयर की आंकलित राशि ही प्रदान किए जाने का आदेश स्थिर रखने योग्य नहीं है ।

अपीलार्थीगण ने अपने दावों के समर्थन में Oriental Insurance Co. Ltd. Vs. The Government Tool Room & Trainingg Centre सहित कई न्यायदृष्टांतों का भी अवलंबन लिया ।

बीमा कंपनी के बचाव और सर्वेयर रिपोर्ट की विश्वसनीयता
उत्तरवादी बीमा कंपनी की ओर से अधिवक्ता श्री अभय चंद्रवंशी ने लिखित तर्क पेश करते हुए कहा कि जिला आयोग का निर्णय सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पारित किया गया है । उन्होंने जोर देकर कहा कि बीमा कंपनी ने सर्वे रिपोर्ट के समर्थन में सर्वेयर का शपथपत्र प्रस्तुत किया था । इसके विपरीत, अपीलार्थीगण द्वारा केवल मरम्मत का अनुमान (Estimate) प्रस्तुत किया गया था, जिसके समर्थन में न तो महिंद्रा केयर का शपथपत्र प्रस्तुत किया गया और न ही वाहन की मरम्मत कराकर कोई फाइनल बिल प्रस्तुत किया गया है । बीमा कंपनी के अनुसार, प्रस्तुत सर्वेयर रिपोर्ट एक अखंडनीय साक्ष्य है ।

बीमा कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि दुर्घटना के समय चालक के पास परिवहन श्रेणी का लाइसेंस न होने के कारण , बीमा पॉलिसी की शर्तों का भंग हुआ था । हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल सर्वेयर द्वारा आंकलित राशि तक ही उत्तरदायी थे, जिसके लिए भी वे चालक के पास वैध लाइसेंस न होने के कारण अधिकारिता नहीं मानते थे ।

आयोग का निर्णायक अवलोकन

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने उभयपक्ष के तर्कों और मूल अभिलेख का गहन अवलोकन किया ।

1. ड्राइविंग लाइसेंस पर निष्कर्ष:
आयोग ने सबसे पहले बीमा कंपनी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था। आयोग ने पाया कि वाहन का चालक (दिवंगत रामनारायण साहू) के पास L.M.V. (हल्का मोटरयान) प्रकृति का वैध ड्राइविंग लाइसेंस था । वाहन का भाररहित वजन 1090 किलोग्राम था ।

आयोग ने मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा-2(21) तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुकुन्द देवांगन विरूद्ध ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (2017) के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि: “यदि एक ड्राइवर हल्का मोटरयान (Light Motor Vehicle – LMV) चलाने का लाइसेंस रखता है, तो वह ऐसी श्रेणी के परिवहन यान (Transport Vehicle) को चलाने के लिए किसी अलग पृष्ठांकन की आवश्यकता के बिना चला सकता है।”

इस प्रकार, आयोग ने यह स्पष्ट किया कि दुर्घटना दिनांक को वाहन चालक के पास वैध एवं प्रभावशील ड्राइविंग लाइसेंस था ।

2. क्षतिपूर्ति राशि पर निष्कर्ष (सर्वेयर रिपोर्ट की पुष्टि):

चूंकि लाइसेंस वैध पाया गया, इसलिए बीमा कंपनी द्वारा दावा निरस्त करना सेवा में कमी माना गया। अब मुख्य प्रश्न क्षतिपूर्ति की राशि पर था।

आयोग ने पाया कि अपीलार्थीगण/परिवादीगण ने वाहन की क्षति को टोटल लॉस (Total Loss) की श्रेणी में होने का अभिकथन किया है, जिसका आधार मरम्मत का अनुमान (Estimated Cost) था । इसके विपरीत, सर्वेयर ने क्षति का आंकलन रिपेयर बेसिस पर ₹45,714.50/- किया था।

आयोग ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि अपीलार्थीगण ने सर्वेयर की रिपोर्ट का खंडन करने के लिए कोई विशेषज्ञ रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की । न ही वाहन की वास्तव में मरम्मत कराकर कोई बिल प्रस्तुत किया गया और न ही वाहन की वर्तमान वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के लिए कोई रिपोर्ट दी गई । सर्वेयर की रिपोर्ट के समर्थन में पृथक शपथ-पत्र भी प्रकरण में प्रस्तुत था ।

आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि “किसी विश्वसनीय रिपोर्ट के आधार पर सर्वेयर द्वारा दिए गए रिपोर्ट का खंडन नहीं किया जा सकता, अविश्वास करने का कोई कारण नहीं बनता।” इस आधार पर, संबंधित जिला आयोग द्वारा सर्वेयर रिपोर्ट के आधार पर राशि दिलाए जाने का आदेश न्यायोचित पाया गया ।

छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग का अहम फैसला

उपरोक्त संपूर्ण विवेचना के फलस्वरूप, छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपीलार्थीगण/परिवादीगण द्वारा प्रस्तुत अपील को सारहीन घोषित करते हुए अपास्त (खारिज) कर दिया । आयोग ने जिला आयोग, बिलासपुर द्वारा 27.06.2024 को पारित आदेश की पुष्टि की । दोनों पक्षों को अपील का व्यय स्वयं वहन करने का आदेश दिया गया है ।

अंतिम आदेश दिनांक: 28 नवंबर 2025 अपील क्रमांक: FA/24/634

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